Thursday, 13 August 2015

भाषा की समस्या

उच्च शिक्षा  से उत्पन्न समस्या के निदान तात्कालिक कदम से तो पूर्णतः समाप्त नहीं हो सकता है। लेकिन दीर्घकालीन प्रयास का परिणाम सकारात्मक होगा।
इसके लिए  स्कूली शिक्षा  से ही हिंदी और अंग्रेजी की अनिवार्यता होनी चाहिए। ताकि विधार्थी  इतनी  क्षमता  विकसित कर सके की वह अंग्रेजी पढ़कर हिंदी और हिंदी पढ़कर अंग्रेजी में आसानी से समझ। 

Tuesday, 30 June 2015

भाग्य और कर्म का सम्बन्ध

"अपने विचारों के प्रति सचेत हो,वे ही शब्द बन जाते हैं,
 अपने शब्दों के प्रति सचेत हो,वे ही आपके कर्म बन जातें हैं,
 अपने कर्मों के प्रति सचेत हो,वे ही आपकी आदतें बन जाती है,
 अपनी आदतों के प्रति सचेत हो,वे ही आपका चरित्र बन जाती हैं,

 अपने चरित्र के प्रति सचेत हो,यह आपका भाग्य बन जाता हैं।"

Tuesday, 23 September 2014

दिल दहला देने वाली घटना - सवाल यह उठता है की क्या किसी व्यक्ति की जिंदगी से भी महत्वपूर्ण क्या हो सकता है। जी हाँ दिल्ली के एक चिड़ियाघर में बाघ ने एक व्यक्ति को मार डाला और उसकी जान इसलिए नहीं बचायी जा सकी की  बाड़े के कर्मियों के पास ट्रेंक्यूलाइजर गन (बेहोश करने वाली बंदूक) या अन्य उपकरण मौजूद नहीं था। क्या व्यक्ति से ज्यादा उस बाघ की जिंदगी महत्वपूर्ण है या फिर वो एक आम नागरिक है इसलिए उसकी जिंदगी को महत्वपूर्ण नहीं समझा  गया। अब इस घटना में सफाई जो भी पेश की जाये लेकिन यह दिल दहला देने वाली घटना कई सवालो को खड़ा करता है।
क्या चिड़िया घर की कर्मचारियों को  उस प्रावधान का ज्ञान नहीं है जिसमे भारतीय संबिधान जीवित रहने का अधिकार देता है । 

Saturday, 17 May 2014

शेर को शिकार करते देखकर लोग यही दुआ करतें है की वह बच जाय और जैसे ही वह बच जाता है लोग ख़ुशी से उच्छल पडतें है । ऐसा नहीं है की लोग उस शिकार से प्यार करतें है इसीलिए ख़ुशी से उच्छल पडतें है बल्कि वो ऐसा इसलिए क्योंकि लोग उस शेर से नफ़रत करतें है । 

Thursday, 15 May 2014

''क्या हममे से अधिकांश हिन्दू यह नही सोचतें की भारत हिन्दुओं क़ी भूमि हैं। लेकिन मै बता देना चाहता हूँ कि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पडोशी जहां आज़ादी है,बहुशंख्यक के अनुसार ही देश चलता है बावज़ूद इसके वहा आराजकता के  आलम  हैं । 

Wednesday, 14 May 2014

स्थानीय समस्याओं का समाधान एक स्थानीय  ईमानदार और सही प्रत्यासी ही  कर सकता है,दिल्ली या गुजरात से कोई नहीं आयेगा। 

Tuesday, 6 May 2014

आम जनता की मूर्खता

वर्तमान में आम सभा का चुनाव एक गंदी राजनिति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण बनकर रह गय है।बड़े-बड़े नेता लोगो को मुख्य मुद्दे से हटाकर अपनी ऊल्लू सीधा करने को प्रयाशरत है।कोई भी नेता लोगो को अपनी विकास नीति बताकर आकर्षित नहीं कर रहा  है बल्कि एक दुसरे पर कीचड उझाल कर वोंट बैंक की राजनीति कर रहा  है। जनता भी इनके झांसे मे आकर वाह! वाह! कर रही है लेकिन वास्तविकता कुछ और है और वो यह है कि इन नेताओ के पास कोइ सटीक विकासनिति है ही नही। 
                                          बबलू देव 
                                    (खड्डा-कुशीनगर) 
                              deobabaloo@gmail.com